Last Updated:March 16, 2026, 08:59 IST
West Bengal Assembly Election: विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. पश्चिम बंगाल में भी चुनाव होने वाले हैं. इलेक्शन कमीशन ने बंगाल में दो चरणों में वोटिंग कराने की घोषणा की है. यहां सत्तारूढ़ टीएमसी और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है. बीजेपी कुछ सालों से यहां की सत्ता में एड़ी चोटी का जोर लगा रही है. इस बार भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर रही है. ऐसे में बंगाल में इस बार चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प होन वाला है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तिथियों का ऐलान कर दिया है. चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही राज्य की चुनावी तस्वीर को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. इस बार राज्य में मतदान केवल दो चरणों में कराया जाएगा, जो चुनावी रणनीतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पिछले चुनावों के नतीजों को नए चरणबद्ध कार्यक्रम पर लागू कर देखने से स्पष्ट होता है कि यह व्यवस्था सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल और विपक्षी भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है.
बंगाल में दो चरणों में होने वाले चुनाव ने राज्य के चुनावी परिदृश्य को लगभग दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है. पहले चरण में जहां मुकाबला अपेक्षाकृत कड़ा दिखाई देता है, वहीं दूसरे चरण में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा स्पष्ट रूप से नजर आता है. यही वजह है कि दोनों प्रमुख दलों की चुनावी रणनीति भी चरणों के हिसाब से अलग-अलग बनती दिख रही है.
पहला फेज
23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण में कुल 152 सीटों पर मतदान होना है. यदि 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजों को इन सीटों के आधार पर देखा जाए तो तृणमूल कांग्रेस को लगभग 92 सीटों पर बढ़त मिलती दिखाई देती है, जो करीब 60.5 प्रतिशत है. वहीं भाजपा को 59 सीटों पर जीत मिली थी, जो लगभग 38.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है, जबकि एक सीट अन्य दलों के खाते में जाती दिखती है. इस चरण का राजनीतिक भूगोल काफी मिश्रित माना जा रहा है. उत्तर, पश्चिम और मध्य पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में हरे और भगवा दोनों रंगों की मौजूदगी देखी गई थी. इसी क्षेत्र में 2021 के चुनाव के दौरान भाजपा ने अपनी सबसे मजबूत पकड़ बनाई थी. उस समय सत्ताविरोधी लहर और व्यापक राजनीतिक विस्तार के कारण भाजपा ने उन इलाकों में भी पैठ बनाई, जहां पहले उसका प्रभाव सीमित था. इसलिए पहले चरण को भाजपा के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल माना जा रहा है, जहां पार्टी अपनी स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश करेगी.
दूसरा फेज
दूसरे चरण की तस्वीर भाजपा के लिए कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है. 29 अप्रैल को होने वाले इस चरण में कुल 142 सीटों पर मतदान होगा. इन सीटों में से लगभग 123 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है, जो करीब 86.6 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाता है. इसके विपरीत भाजपा को केवल 18 सीटों पर जीत मिली थी, जो लगभग 12.7 प्रतिशत के बराबर है, जबकि एक सीट अन्य के खाते में जाती है. यह इलाका तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है. यही वह क्षेत्र है जिसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र लंबे समय से तृणमूल के कल्याणकारी कार्यक्रमों और मजबूत संगठनात्मक ढांचे से जुड़ा रहा है.
TMC के गढ़ में कैसे लगेगी सेंध
विश्लेषकों का मानना है कि इस चरण में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल के पारंपरिक मतदाता आधार में सेंध लगाने की होगी. महिलाओं, अल्पसंख्यकों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का समर्थन तृणमूल को लगातार मिलता रहा है, जिससे पार्टी की पकड़ मजबूत बनी हुई है. दो चरणों में होने वाला यह चुनाव पश्चिम बंगाल को दो अलग-अलग चुनावी मैदानों में बांटता दिखाई दे रहा है. एक ओर पहले चरण में कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, वहीं दूसरे चरण में तृणमूल का मजबूत प्रभाव नजर आता है. ऐसे में आगामी महीनों में दोनों दलों की रणनीति और चुनावी अभियान इसी विभाजन को ध्यान में रखते हुए तय किए जाने की संभावना है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
Kolkata,West Bengal
First Published :
March 16, 2026, 08:42 IST

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