किसान बनाएं गौमूत्र से कीटनाशक, लाखों की होगी बचत, पैदावार होगी तगड़ी

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किसान बनाएं गौमूत्र से कीटनाशक, लाखों की होगी बचत, पैदावार होगी तगड़ी

Last Updated:March 16, 2026, 18:12 IST

जैविक खेती में देशी गाय का गौमूत्र बेहद उपयोगी माना जाता है. गौमूत्र से प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किया जा सकता है, जो फसलों को कीट और बीमारियों से बचाने में मदद करता है.गौमूत्र से कीटनाशक बनाने के लिए एक लीटर गौमूत्र में करीब सात से आठ लीटर पानी मिलाया जाता है. इस मिश्रण को करीब 48 घंटे तक रखा जाता है

आज के समय में अधिक उत्पादन की होड़ में किसान बड़ी मात्रा में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे है. हालांकि इससे फसल की पैदावार बढ़ती है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं. रासायनिक खाद के लगातार उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और इसका असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है. ऐसे में अब कई किसान जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं. जो उनके लिए फायदेमंद भी साबित हो रहा है.

जैविक खेती का बढ़ता महत्व
किसान सतीश दुबे बताते है कि जैविक खेती एक ऐसी पद्धति है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर खेती की जाती है. इसमें रासायनिक खाद और दवाइयों के बजाय प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है. फसल भी अधिक सुरक्षित मानी जाती है. यही कारण है कि अब कई किसान इस पद्धति को अपनाने लगे हैं.

गौमूत्र से तैयार हो रहा प्राकृतिक कीटनाशक
आगे कहा कि जैविक खेती में देशी गाय का गौमूत्र बेहद उपयोगी माना जाता है. गौमूत्र से प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किया जा सकता है, जो फसलों को कीट और बीमारियों से बचाने में मदद करता है. इसे तैयार करने के लिए किसानों को सबसे पहले एक लीटर देशी गाय का गौमूत्र इकट्ठा करना होता है.

तैयार करने की आसान प्रक्रिया
गौमूत्र से कीटनाशक बनाने के लिए एक लीटर गौमूत्र में करीब सात से आठ लीटर पानी मिलाया जाता है. इस मिश्रण को करीब 48 घंटे तक रखा जाता है. इसके बाद यह घोल फसलों पर छिड़काव के लिए तैयार हो जाता है. माना जाता है कि इस घोल के उपयोग से कई प्रकार के कीट और रोगों का असर कम हो जाता है.

सब्जी और बागवानी में भी उपयोगी
इस प्राकृतिक कीटनाशक का उपयोग सब्जियों की खेती से लेकर बागवानी तक में किया जा सकता है. इससे पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है.

किसान सतीश दुबे का अनुभव
किसान सतीश दुबे पिछले चार वर्षों से इस तरीके को अपनाते आ रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने रासायनिक खाद और दवाइयों का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया है. फसल में जब भी कीट लगते हैं, तो वे गौमूत्र से तैयार घोल का ही छिड़काव करते हैं.

जीवामृत का भी करते हैं उपयोग
सतीश दुबे बताते हैं कि खेती में वे जीवामृत का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सबसे आसान और सस्ता तरीका गौमूत्र का उपयोग है. इससे खेती की लागत भी कम हो जाती है और फसल भी सुरक्षित रहती है.

कम लागत में टिकाऊ खेती का रास्ता
उन्होंने कहा कि यदि किसान इस तरह के प्राकृतिक उपाय अपनाएं तो खेती की लागत कम हो सकती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है. जैविक खेती भविष्य में किसानों के लिए टिकाऊ और लाभदायक विकल्प बन सकती है.

Location :

Palamu,Jharkhand

First Published :

March 16, 2026, 18:12 IST

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