EID 2026: हाथ की मेहनत का जादू! हैदराबाद में शीर खुरमा की बढ़ी मिठास, आसमान छू रही सेवइयों की मांग

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हाथ की मेहनत का जादू! हैदराबाद में शीर खुरमा की बढ़ी मिठास, आसमान छू रही मांग

Last Updated:March 13, 2026, 12:19 IST

EID 2026: हैदराबाद में ईद-उल-फितर 2026 के आने के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है. इस बार भी त्योहार की सबसे खास मिठास, शीर खुरमा के लिए हाथ से बनी सेवइयों की मांग जबरदस्त है. पीढ़ियों से कारीगर इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं और महीनों पहले से इसकी तैयारी में जुट जाते हैं. हाथ से बनी सेवइयां मशीन निर्मित की तुलना में कुरकुरी और स्वादिष्ट होती हैं, जिससे शीर खुरमा का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. मांग बढ़ने के बावजूद लोग अपने पारंपरिक स्वाद से समझौता नहीं करते.

हैदराबाद: ईद-उल-फितर 2026 के आगमन की आहट के साथ ही निजामों के शहर हैदराबाद के बाजारों में रौनक बढ़ गई है. इस साल भी त्योहार की सबसे खास मिठास, शीर खुरमा के लिए इस्तेमाल होने वाली हाथ से बनी सेवइयों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है. शीर खुरमा, जिसका शाब्दिक अर्थ “मीठा दूध” होता है, ईद के जश्न का एक अनिवार्य हिस्सा है. दूध, खजूर और भरपूर सूखे मेवों के संगम से बनने वाला यह व्यंजन ईद की सुबह नाश्ते के रूप में और पूरे दिन मेहमानों के स्वागत के लिए परोसा जाता है.

हैदराबाद के पुराने शहर के कई परिवार पीढ़ियों से इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं. विशेष रूप से चदरघाट जैसे इलाकों में कई ऐसे कारीगर हैं जो महीनों पहले से इस कड़ी मेहनत वाले कार्य में जुट जाते हैं. इन्हीं में से एक अनुभवी कारीगर सलीम खान हैं, जो पिछले कई वर्षों से इस पेशे से जुड़े हैं. उनके अनुसार, हाथ से सेवइयां बनाना केवल एक काम नहीं बल्कि एक हुनर है, जिसमें अपार धैर्य और कुशलता की आवश्यकता होती है.

हाथ से तैयार सेवइयाें का कुरकुरापन बरकरार रहता है

हाथ से बनी सेवइयों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बनावट और स्वाद है, जहां मशीन से बनी सेवइयां दूध में डालने पर अक्सर चिपचिपी हो जाती हैं, वहीं हाथ से तैयार की गई सेवइयां अपना आकार और कुरकुरापन बरकरार रखती हैं, जिससे शीर खुरमा का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. यही कारण है कि गुणवत्ता के मामले में बेहतर होने की वजह से ये सेवइयां मशीन निर्मित उत्पाद की तुलना में 3 से 5 गुना तक महंगी होती हैं. मौजूदा बाजार भाव के अनुसार थोक भाव 300 से 350 रुपये प्रति किलो है, जबकि खुदरा भाव 400 से 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंचता है.

कारीगर घंटों की कड़ी मेहनत से तैयार करते हैं सेवइयां 

इन बारीक रेशों को तैयार करने की प्रक्रिया ईद से कई महीने पहले शुरू हो जाती है. कारीगर घंटों की कड़ी मेहनत के बाद नाजुक सेवइयां तैयार करते हैं. हालांकि, इनकी बिक्री का चरम समय रमजान का पवित्र महीना होता है, जब परिवार त्योहार की तैयारियों के लिए पहले से ही स्टॉक जमा करना शुरू कर देते हैं. बढ़ती लागत और मेहनत के बावजूद, हैदराबाद के लोग अपने पारंपरिक स्वाद से समझौता करने को तैयार नहीं हैं, जिससे 2026 की ईद पर भी इन हस्तनिर्मित सेवइयों की मांग आसमान छू रही है.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट...और पढ़ें

Location :

Hyderabad,Telangana

First Published :

March 13, 2026, 12:19 IST

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