F-15 से KC-135 तक: ईरान जंग में ट्रंप को दिन में दिखे तारे, एक-एक कर गवां दिए अपने 4 ‘बाहुबली’

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Last Updated:March 13, 2026, 13:51 IST

ईरान के खिलाफ जारी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में अमेरिकी एयरफोर्स को बड़े नुकसान का सामना पड़ा है. हाल में अमेरिका को अपना केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर प्‍लेन खोना पड़ा है. इसी के साथ, ईरान वॉर में अमेरिका ने अपने 4 एयरक्राफ्ट खो दिए हैं.

ईरान जंग में ट्रंप को दिन में दिखे तारे, एक-एक कर गवां दिए अपने 4 ‘बाहुबली’Zoom

ईरान में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को अंजाम देने पहुंचा केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर क्रैश हो गया है. (एआई इमेज)

America-Iran War: ईरान पर सैन्‍य कार्रवाई को अमेरिका जितना आसान मानकर चल रहा था, उसको उतनी ही कठिन चुनौतियों का लगातार सामना करना पड़ रहा है. वॉर के 14वें दिन ईरान से अमेरिका को एक बार फिर बड़ा झटका मिला है. अमेरिका के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से जुड़ा जुड़ा केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर (KC-135 Stratotanker) रीफ्यूलिंग प्‍लेन पश्चिमी इराक में क्रैश हो गया है. इस क्रैश की पुष्टि खुद यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने की है. आपको बता दें कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ 28 फरवरी को अमेरिका की तरफ से ईरान के खिलाफ शुरू किया गया एक मिलिट्री ऑपरेशन है.

कहां और कैसे क्रैश हुआ केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर प्‍लेन

यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस मिशन में दो केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर प्‍लेन शामिल थे. इनमें से एक प्‍लेन पश्चिमी इराक में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जबकि दूसरा सुरक्षित तरीके से लैंड करने में सफल रहा. सेंटकॉम (CENTCOM) का दावा है कि यह क्रैश दुश्मन की गोलीबारी या अपनी ही सेना की फायरिंग की वजह से नहीं हुआ है. इस दावे के बाद अंदेशा जताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान प्‍लेन में आई तकनीकी खराबी की वजह से यह क्रैश हुआ है. हालांकि इस क्रैश के बाद एक दावा इराक के ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस’ नाम के एक ग्रुप की तरफ से भी किया गया है. ग्रुप का दावा है कि उसी ने इस प्‍लेन को गिराया है. संगठन ने बयान जारी कर कहा कि उसने इराक की संप्रभुता और एयर स्‍पेस की रक्षा के लिए अमेरिकी प्‍लेन को निशाना बनाया है. केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर के क्रैश के साथ ही ईरान के साथ जारी इस युद्ध में क्रैश होने वाली अमेरिकी प्‍लेंस की संख्‍या बढ़कर चार हो गई है. जिसमें तीन एफ-15ई स्‍ट्राइक ईगल फाइटर प्‍लेंस भी शामिल हैं. हालांकि इस गंभीर घटनाओं के बीच राहत की बात यह रही कि सभी पायलट सुरक्षित बच गए. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, F-15E स्‍ट्राइक ईगल फाइटर प्‍लेन में सवार छह क्रू मेंबर समय रहते इजेक्ट करने में कामयाब रहे और उन्हें बाद में सुरक्षित निकाल लिया गया.

क्यों अहम है केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर?
केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर को आधुनिक हवाई युद्ध की रीढ़ माना जाता है. यह एक ऐसा रीफ्यूलिंग प्‍लेन है जो हवा में ही लड़ाकू प्‍लेंस और बमवर्षकों को फ्यूल मुहैया कराता है. इसकी वजह से फाइटर जेट्स लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं और दुश्मन के ठिकानों पर लगातार हमले करने में सक्षम रहते हैं. ऐसे मिशनों में कई प्‍लेन एक साथ काम करते हैं और हवा में ही ईंधन ट्रांसफर करने की जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है. खासकर युद्ध के दौरान, जब चौबीसों घंटे ऑपरेशन चलते रहते हैं, तब इस तरह के टैंकर प्‍लेंस का रोल बेहद अहम हो जाता है.

अमेरिका ने कब और कहां खोए अपने F-15E फाइटर प्‍लेन?
युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिका को बड़ा सैन्‍य नुकसान झेलना पड़ा था. इस नुकसान में अमेरिका के तीन F-15E स्‍ट्राइक ईगल फाइटर प्‍लेन का कुवैत के ऊपर क्रैश होना भी शामिल है. यह प्‍लेन ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के शुरुआती हमलों का हिस्सा थे. रिपोर्टस के मुताबिक, कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने गलती से इन प्‍लेंस को दुश्मन का प्‍लेन समझ लिया. इसी भ्रम के बीच कुवैत के एक एफ/ए-18 हॉरनेट (F/A-18 Hornet) फाइटर जेट ने अमेरिकी प्‍लेंस पर फायरिंग कर दी. नतीजतन तीनों F-15E प्‍लेन मार गिराए गए. अमेरिकी वायुसेना के लिए ये तीनों क्रैश बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है.

ड्रोन्‍स के मामले में अमेरिका को कितना नुकसान हुआ है?
अमेरिका को अपने ड्रोन बेड़े में भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है. रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और इराक के ऊपर चलाए जा रहे मिशनों के दौरान करीब 11 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन मार गिराए गए. दरअसल, एमक्यू-9 रीपर जैसे ड्रोन अक्सर दुश्मन के इलाके के भीतर गहराई तक जाकर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने का काम करते हैं. ऐसे मिशनों में जोखिम ज्यादा होता है, इसलिए वॉर जोन में उड़ान भरने वाले ड्रोन अक्सर निशाना बन जाते हैं.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to ...और पढ़ें

First Published :

March 13, 2026, 13:51 IST

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