Fish farming: लखीमपुर खीरी में किसान पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन अपनाकर आय बढ़ा रहे है. बढ़ती बाजार मांग और मत्स्य विभाग की अनुदान व प्रशिक्षण योजनाओं से यह व्यवसाय तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. खीरी के 65 वर्षीय रामनरेश ने 1991 में ग्राम सभा के तालाब से शुरुआत की थी. मेहनत के दम पर आज उनके दो निजी तालाब है. जिनमें रोहू, नैन, भाकूर, सिल्वर कार्प, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प पाली जाती है. बाजार में इनकी कीमत औसतन 120 से 140 रुपये प्रति किलो मिल जाती है. मछली पालन से उनकी आय में अच्छा इजाफा हुआ है और वे अन्य किसानों को भी इससे जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे है.
Fish farming: मछली पालन है कमिया का जरिया, जल्द बन जाएंगे धनवान; जानिए क्यों हैं ये बेस्ट
1 month ago
- Homepage
- News in Hindi
- Fish farming: मछली पालन है कमिया का जरिया, जल्द बन जाएंगे धनवान; जानिए क्यों हैं ये बेस्ट


