Business Idea: बिहार के किसानों के लिए खेती अब सिर्फ फसल उगाने तक सीमित नहीं रही. बल्कि वे अब छोटे प्रोसेसर भी बन रहे हैं. सीतामढ़ी के किसान आलोक कुमार ने केंद्र सरकार की SMAM (सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन) योजना का लाभ उठाकर अपने घर में ही मिनी राइस मिल स्थापित की है. 40% से 50% तक सब्सिडी के कारण यह पोर्टेबल मशीन महज 7000 रुपये के शुरुआती निवेश में उपलब्ध हो रही है, जिसने ग्रामीण इलाकों में धान कुटाई की तस्वीर बदल दी है. बड़ी मिलों की तुलना में इसमें चावल टूटने की दर बहुत कम है. इससे किसानों को साफ और साबुत चावल मिलता है. जिसकी बाजार में कीमत अधिक होती है. पहले ट्रैक्टर या बैलगाड़ी से धान को मिल तक ले जाने में भारी किराया और समय खर्च होता था. अब घर के बरामदे में ही कुटाई संभव है. किसान अपनी जरूरत पूरी करने के अलावा आसपास के पड़ोसियों का धान कुटकर भी अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं. किसान आलोक कुमार के अनुसार सरकारी योजना ने इस मशीन को इतना सस्ता बना दिया है कि एक छोटे किसान के लिए भी इसे खरीदना आसान है. यह मशीन कम बिजली की खपत करती है. इसे कहीं भी ले जाना आसान है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी छोटी प्रोसेसिंग यूनिट्स से किसान कच्चे माल की जगह फिनिश्ड प्रोडक्ट (चावल) बेचकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं.
Video: 7 हजार में राइस मिल! अब धान कुटाई के लिए नहीं काटने होंगे चक्कर, जानें बंपर कमाई का मंत्र
9 hours ago
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