Last Updated:March 12, 2026, 17:55 IST
पश्चिम एशिया संकट पर सरकार ने बड़ी ब्रीफिंग दी है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत का 70% कच्चा तेल सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों से आ रहा है, जिससे पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सहज है. हालांकि, 90% एलपीजी आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर होने के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण है. सरकार ने पैनिक बुकिंग न करने की अपील की है. वहीं, विदेश मंत्रालय ईरान में फंसे 9,000 भारतीयों को निकालने और युद्ध क्षेत्र में नागरिकों की सुरक्षा के लिए सक्रिय है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थितियों के बीच भारत सरकार ने अपनी तैयारियों को लेकर एक विस्तृत ज्वाइंट प्रेस ब्रीफिंग की है. चार मंत्रालयों के अधिकारियों ने तेल आपूर्ति, एलपीजी की स्थिति और फंसे हुए भारतीयों के रेस्क्यू पर देश के सामने पूरा लेखा-जोखा रखा. सरकार का संदेश साफ है: तेल और ईंधन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन सावधानी और कूटनीतिक मुस्तैदी अनिवार्य है.
कच्चा तेल: 70% आपूर्ति सुरक्षित रास्तों से
पेट्रोलियम मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर भारत फिलहाल ‘कंफर्टेबल’ स्थिति में है. भारत के कच्चे तेल के कुल आयात का 70% से अधिक हिस्सा अब ऐसे समुद्री मार्गों से आ रहा है जो तनावग्रस्त ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होकर नहीं गुजरते. सरकार ने पिछले कुछ समय में अपनी सप्लाई चेन को इस तरह डायवर्सिफाई किया है कि युद्ध की स्थिति में भी देश के एक लाख रिटेल आउटलेट्स पर पेट्रोल-डीजल की कमी (ड्राई-आउट) की कोई सूचना नहीं है.
एलपीजी: हॉर्मुज रूट सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि, एलपीजी की स्थिति कच्चे तेल के मुकाबले थोड़ी अधिक चुनौतीपूर्ण है. भारत अपनी जरूरत का 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका 90% हिस्सा अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है. कतर जैसे देशों से आने वाली सप्लाई इसी रूट पर निर्भर है. इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने तीन सदस्यीय कार्यकारी समिति बनाई है. अधिकारियों ने बताया कि देश में रोजाना 50 लाख सिलेंडर बांटे जा रहे हैं. पैनिक बुकिंग के कारण मांग बढ़ी है, इसलिए सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में बुकिंग न करें और अस्पतालों जैसे आपातकालीन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है.
रेस्क्यू और कूटनीति: ईरान-इराक में भारतीयों की सुरक्षा
विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों ने युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीयों को लेकर अहम जानकारी साझा की. ईरान में लगभग 9,000 भारतीय मौजूद हैं. दूतावास उन्हें आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते सुरक्षित निकालने में मदद कर रहा है. दुखद रूप से, इराक में एक जहाज पर हमले के कारण एक भारतीय की मौत की पुष्टि हुई है, जिसके बाद भारतीय दूतावास वहां मौजूद अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर संपर्क में है.
सवाल-जवाब
एलपीजी की आपूर्ति को लेकर सरकार ने क्या विशेष सावधानी बरती है?
सरकार ने ओएमसी (OMCs) के तीन कार्यकारी निदेशकों की समिति बनाई है जो वितरण की निगरानी कर रही है. अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता दी गई है और आम जनता से पैनिक बुकिंग न करने की अपील की गई है.
पश्चिम एशिया संकट का भारत के तेल आयात पर तत्काल क्या असर पड़ा है?
कच्चे तेल पर असर कम है क्योंकि 70% आयात वैकल्पिक रूट से आ रहा है. हालांकि, एलपीजी का 90% आयात हॉर्मुज रूट से होने के कारण वहां अधिक निगरानी और प्रबंधन की जरूरत है.
इससे पहले आज विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव में गहराते ऊर्जा संकट के बीच भारत से डीजल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की गुहार लगाई है. भारत अपनी घरेलू क्षमता का आकलन कर इन पड़ोसियों की मदद करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. बताया गया कि पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हुई तीन बैक-टू-बैक फोन कॉल्स ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापारिक मार्गों (Strait of Hormuz) को लेकर जमी बर्फ पिघला दी है. इस ‘साइलेंट डिप्लोमेसी’ के जरिए भारत ने न केवल कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की है बल्कि लाल सागर और फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरान के साथ सीधा समन्वय स्थापित किया है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
First Published :
March 12, 2026, 17:55 IST

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