Last Updated:February 27, 2026, 09:01 IST
आजतक आपको यही लगता होगा कि भूकंप से धरती और इंसानों को काफी नुकसान होता होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भूकंप का हर झटका धरती को अमीर बना देता है. जी हां, भूकंप और सोने की खदान का पुराना रिश्ता है. आखिर कैसे?

धरती पर सोने की खदानें कैसे बनती हैं, यह सवाल सदियों से वैज्ञानिकों को हैरान करता रहा है. आमतौर पर हम सोचते हैं कि भूकंप सिर्फ विनाश लाते हैं, इमारतें गिरती हैं, जानें जाती हैं और तबाही मचती है. लेकिन नई वैज्ञानिक खोज बताती है कि भूकंप धरती को अमीर भी बनाते हैं!
जी हां, हर बड़े झटके से सोने के छोटे-छोटे कण जमा होकर बड़े नगेट्स और सोने की मोटी परतें बनाते हैं, जो लाखों-करोड़ों सालों में विशाल सोने की खदानें तैयार कर देते हैं. यह रहस्य हाल ही में नेचर जियोसाइंस जर्नल में छपी एक स्टडी से खुला है.
क्या निकला रिसर्च में?
ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर वॉयसी और उनकी टीम ने प्रयोगों से साबित किया कि क्वार्ट्ज (एक आम खनिज) में piezoelectricity नाम की खास प्रॉपर्टी होती है. जब भूकंप आता है, तो टेक्टॉनिक प्लेट्स की वजह से चट्टानों पर भारी दबाव पड़ता है, जिससे क्वार्ट्ज क्रिस्टल्स दबकर बिजली पैदा करते हैं. यह बिजली गर्म हाइड्रोथर्मल फ्लुइड्स (पानी और कार्बन डाइऑक्साइड से भरे तरल) में घुले सोने के आयन्स को आकर्षित करती है और उन्हें ठोस सोने में बदल देती है. पहले वैज्ञानिक जानते थे कि सोना क्वार्ट्ज वेंस में हॉट फ्लुइड्स से जमा होता है. भूकंप दरारें खोलते हैं, फ्लुइड्स अंदर घुसते हैं, दबाव कम होने से मिनरल्स क्रिस्टलाइज हो जाते हैं– इसे फ्लैश वेजराइजेशन या फ्लैश डिपॉजिशन कहते हैं. 2013 की एक स्टडी में बताया गया था कि हर भूकंप से फॉल्ट जोन में 0.1 मिलीग्राम सोना प्रति वर्ग मीटर जमा हो सकता है.
बनती है सोने की खदान
सैकड़ों-हजारों भूकंपों से यह मात्रा बढ़कर 100 टन तक की सोने की डिपॉजिट बन सकती है, सिर्फ 1 लाख सालों में! दुनिया के 80% से ज्यादा सोने की डिपॉजिट्स इसी तरह बनी हैं. लेकिन सोने के बड़े-बड़े नगेट्स (जैसे 70 किलो तक के) कैसे बनते हैं– यह रहस्य अब piezoelectricity से सुलझा है. क्वार्ट्ज इंसुलेटर है, लेकिन सोना कंडक्टर है. पहली बार जब बिजली से सोना जमा होता है, तो छोटे पार्टिकल्स बनते हैं. अगले भूकंप में ये पार्टिकल्स इलेक्ट्रिक फील्ड को और मजबूत करते हैं, जैसे लाइटनिंग रॉड ज्यादा सोने को खींचते हैं. इस तरह एक जगह पर सोना बार-बार जमा होता जाता है, छोटे कण बड़े टुकड़ों में बदल जाते हैं. लैब में क्वार्ट्ज को गोल्ड सॉल्यूशन में डालकर दबाव डालने पर वैज्ञानिकों ने सोने के नैनोपार्टिकल्स और क्लस्टर्स बनते देखे. यह प्रक्रिया ओरोजेनिक गोल्ड डिपॉजिट्स में आम है, जहां माउंटेन बिल्डिंग के दौरान भूकंप ज्यादा होते हैं. कैलिफोर्निया गोल्ड रश, ऑस्ट्रेलिया की खदानें, भारत की कोलार गोल्ड फील्ड्स – ये सब इसी मैकेनिज्म से बनी है.
First Published :
February 27, 2026, 09:01 IST

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