Last Updated:March 14, 2026, 15:08 IST
CBSE Anti Cheating Rules 2026: सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए नियम पहले से भी ज्यादा सख्त कर दिए हैं. अब अगर कोई स्टूडेंट नकल करते हुए पकड़ा गया तो उसका पास होना नामुमकिन हो जाएगा. जानिए सीबीएसई के नए और सख्त नियम.

नई दिल्ली (CBSE Anti Cheating Rules 2026). सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बहुत सख्त रुख अपनाया गया है. बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षाओं के दौरान किसी भी तरह की अनुचित गतिविधियों या नकल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब तक छोटी-मोटी नकल के मामलों में मामूली सजा या केवल 1 विषय में निलंबित किया जाता था. लेकिन नए नियमों के तहत अनफेयर मीन्स (UFM) में पकड़े जाने पर पूरा साल बर्बाद हो सकता है.
इन बदलावों के जरिए सीबीएसई परीक्षा केंद्रों पर होने वाली धांधली को जड़ से खत्म किया जा सकेगा. अगर कोई छात्र संदिग्ध सामग्री, मोबाइल फोन या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के साथ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. सीबीएसई बोर्ड ने ऐसे मामलों में किसी भी तरह की रियायत न देने की नीति अपनाई है. इन नियमों के लागू होने के बाद केवल रट्टा मारना या नकल के भरोसे रहना भारी पड़ सकता है. अब पकड़े जाने पर रिजल्ट में फेल या डिबार की मुहर लग सकती है.
सीबीएसई का फैसला: बहुत महंगी पड़ सकती है नकल
सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षाओं के लिए सुरक्षा और निगरानी का स्तर बढ़ा दिया है. जानिए सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के नए नियम:
समझें ‘अनफेयर मीन्स’ (UFM) की नई परिभाषा
सीबीएसई बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र में केवल नकल की पर्ची रखना ही अपराध नहीं है, बल्कि उत्तर पुस्तिका पर किसी भी तरह का गुप्त संदेश लिखना, किसी दूसरे स्टूडेंट की मदद करना या ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ करना भी यूएफएम के दायरे में आएगा. ऐसे मामलों में स्टूडेंट को न केवल उस विशेष परीक्षा से बाहर कर दिया जाएगा, बल्कि बोर्ड उसे आने वाली अन्य परीक्षाएं देने से भी रोक सकता है.
परीक्षा केंद्रों में निगरानी कैसे की जाएगी?
सीबीएसई परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की लाइव निगरानी के साथ-साथ इस बार फ्लाइंग स्क्वॉड की संख्या भी बढ़ाई गई. अगर कोई छात्र परीक्षा केंद्र में प्रतिबंधित वस्तुएं (जैसे- स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर या डिजिटल पेन) लेकर आता है तो इसे जानबूझकर की गई धोखाधड़ी माना जाएगा. ऐसे छात्रों का रिजल्ट होल्ड पर रख दिया जाएगा और मामले की जांच के लिए गठित समिति का फैसला अंतिम होगा.
स्कूलों और अभिभावकों के लिए चेतावनी
सीबीएसई ने स्कूलों को भी निर्देश दिया है कि वे स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता को इन नियमों के बारे में पहले ही सूचित कर दें. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी स्कूल की तरफ से सामूहिक नकल की सुविधा दी गई तो उस स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है. अब छात्रों को केवल अपनी मेहनत और तैयारी पर भरोसा करना होगा क्योंकि एक गलती पूरे करियर को दांव पर लगा सकती है.
पुराना नियम: नकल के बावजूद पास होने का रास्ता
पहले सीबीएसई की व्यवस्था कुछ ऐसी थी कि अगर कोई छात्र किसी मुख्य विषय (जैसे गणित या विज्ञान) में नकल करते हुए पकड़ा जाता था और बोर्ड उस विषय में उसका रिजल्ट रद्द कर देता था, तब भी उसके पास बचने का एक मौका होता था. छात्र अपने अतिरिक्त विषय (6th or 7th Subject) के नंबरों का इस्तेमाल उस रद्द हुए विषय की जगह कर लेता था. इस ‘सब्जेक्ट रिप्लेसमेंट’ पॉलिसी की वजह से छात्र के कुल अंकों का प्रतिशत बिगड़ता नहीं था और वह मार्कशीट पर ‘पास’ घोषित कर दिया जाता था.
हैरान करने वाले आंकड़े
सीबीएसई के पिछले रिकॉर्ड चौंकाने वाली सच्चाई बयां करते हैं. वर्ष 2025 की मुख्य परीक्षाओं में करीब 30 से 40 प्रतिशत छात्र ऐसे थे, जो ‘अनुचित साधन’ (UFM) के तहत पकड़े तो गए लेकिन एडिशनल सब्जेक्ट की इस नीति की वजह से फेल होने से बच गए. बोर्ड ने अब इसी लूपहोल को बंद करने का फैसला किया है, जिससे ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो सके और परीक्षा की गरिमा बनी रहे.
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First Published :
March 14, 2026, 15:08 IST

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