Last Updated:March 16, 2026, 16:22 IST
Bihar Rajya Sabha Election Controversy: बिहार के राज्यसभा चुनाव में पांचवीं सीट को लेकर महागठबंधन ने पूरी तैयारी के साथ चुनावी गणित बनाया था, लेकिन मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक के वोट नहीं पड़ने से समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस के चक्कर में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक बार फिर सियासी फेरे में फंस गए हैं?

पटना. बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हो रहे चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की जीत को लेकर महागठबंधन ने पूरा गणित तैयार किया था, लेकिन मतदान के दौरान कुछ विधायकों की गैरहाजिरी ने स्थिति को पेचीदा बना दिया है. मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक के वोट नहीं पड़ने से महागठबंधन की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. इससे पांचवीं सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बढ़त की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. बता दें कि तेजस्वी यादव ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और मायावती की पार्टी बसपा के विधायकों का समर्थन लेकर जीत का जरूरी आंकड़ा पूरा करने की रणनीति बनाई थी. लेकिन मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन विधायकों और राजद के एक विधायक के वोट नहीं पड़ने से पूरा सियासी गणित डगमगाता नजर आ रहा है. इसके बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं तेजस्वी यादव की रणनीति उनके सहयोगी दलों की वजह से ही कमजोर तो नहीं पड़ गई.
महागठबंधन ने जुटाया था अतिरिक्त समर्थन
पांचवीं सीट जीतने के लिए महागठबंधन को अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी. इसके लिए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दूसरे दलों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश की थी. बताया जा रहा है कि ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की पार्टी के विधायकों का समर्थन लेकर महागठबंधन ने अपनी संख्या 41 तक पहुंचा ली थी. यह संख्या जीत के लिए जरूरी मानी जा रही थी. लेकिन, मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक और राजद का एक विधायक वोट देने नहीं पहुंचे. इनमें कांग्रेस के सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह के नाम सामने आए हैं. वहीं राजद के विधायक फैसल अली का वोट भी नहीं पड़ा.
एनडीए के लिए बढ़ सकती है संभावना
अब जब इन चार वोटों की अनुपस्थिति से महागठबंधन की संभावित संख्या 41 से घटकर 37 के आसपास पहुंचती दिख रही है. ऐसे में पांचवीं सीट पर राजद उम्मीदवार की राह मुश्किल मानी जा रही है. दूसरी ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से पांचवें उम्मीदवार के रूप में शिवेश राम मैदान में हैं. एनडीए के पास अपने चार उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी कुछ वोट बचने की संभावना बताई जा रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर विपक्ष के वोट पूरी तरह एकजुट नहीं रहे या कुछ वोट अमान्य हो गए तो इसका फायदा एनडीए को मिल सकता है.
चुनाव परिणाम तक बना रहेगा संशय
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में इस चुनाव के लिए 239 विधायकों ने मतदान किया है. ऐसे में जीत का कोटा भी बदल सकता है. अंतिम नतीजे आने तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि पांचवीं सीट किसके खाते में जाएगी. फिलहाल नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विधानसभा में मौजूद हैं और उन्होंने कहा है कि मतदान का समय खत्म होने तक वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते. उनके अनुसार चुनाव परिणाम आने के बाद ही पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी जाएगी.
महागठबंधन की राजनीति पर भी असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पांचवीं सीट पर महागठबंधन को झटका लगता है तो इसका असर आगे की राजनीति पर भी पड़ सकता है. पहले भी सीट बंटवारे और रणनीति को लेकर महागठबंधन के दलों के बीच मतभेद की चर्चा होती रही है. ऐसे में राज्यसभा चुनाव का यह घटनाक्रम आने वाले समय में विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर सकता है.
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First Published :
March 16, 2026, 16:22 IST

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