Last Updated:March 16, 2026, 16:40 IST
सीतामढ़ी जिले में करीब 5.5 लाख जीविका दीदियों के विशाल नेटवर्क को अब ज्ञान प्रबंधन एवं संचार (KMC) की नई कड़ियों से जोड़ा जा रहा है. इस नई कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के हुनर को आधुनिक बाजार और इंटरनेट की शक्ति से जोड़ना है, ताकि उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों और उनकी मेहनत को वैश्विक पहचान मिल सके.
महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी जीविका अब सीतामढ़ी जिले में विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही है. पिछले 15-20 वर्षों के सफल सफर के बाद, अब परियोजना का ध्यान केवल समूह बनाने तक सीमित न रहकर दीदियों के आर्थिक उत्थान को आधुनिक और तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने पर है.
जिले में करीब 5.5 लाख जीविका दीदियों के विशाल नेटवर्क को अब ज्ञान प्रबंधन एवं संचार (KMC) की नई कड़ियों से जोड़ा जा रहा है. इस नई कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के हुनर को आधुनिक बाजार और इंटरनेट की शक्ति से जोड़ना है, ताकि उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों और उनकी मेहनत को वैश्विक पहचान मिल सके.
बैरगनिया में लहठी क्लस्टर की शुरुआत और 100 दीदियों का चयन
जीविका के आगामी कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण कदम बैरगनिया प्रखंड में लहठी क्लस्टर यानी चूड़ी निर्माण केंद्र की स्थापना है. इसके लिए प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और प्रथम चरण में करीब 100 कुशल दीदियों का चयन किया गया है. इस क्लस्टर के तहत दीदियों को एक ही छत के नीचे कॉमन शेड उन्नत प्रशिक्षण और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे. यह पहल न केवल पारंपरिक रोजगार को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि एक व्यवस्थित प्लेटफॉर्म मिलने से दीदियों के उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होगी. आने वाले समय में यह क्लस्टर जिले के अन्य प्रखंडों के लिए स्वरोजगार का एक मॉडल बनेगा, जिससे दीदियों की मासिक आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा सकेगी.
डिजिटल विजुअल्स और सफलता की कहानियों का वैश्विक प्रसार
जीविका अब अपनी दीदियों की सफलता को दुनिया के सामने लाने के लिए अत्याधुनिक संचार माध्यमों का सहारा लेने जा रही है. जिले के प्रत्येक प्रखंड से ऐसी केस स्टडी चुनी जा रही हैं, जहाँ महिलाओं ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है. इन सफलता की कहानियों की पेशेवर वीडियोग्राफी कराई जाएगी. इन वीडियो का उपयोग न केवल राज्य और देश के स्तर पर होगा, बल्कि विदेशों से आने वाले मेहमानों और नीति निर्माताओं को भी यह दिखाया जाएगा कि बिहार की ग्रामीण महिलाएं किस तरह आर्थिक क्रांति ला रही हैं. इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से इन कहानियों का प्रसार करने से जीविका के उत्पादों की ब्रांडिंग होगी और दीदियों को सीधे बड़े बाजारों से जुड़ने का मौका मिलेगा.
विफलताओं का विश्लेषण और समाधान आधारित नई कार्यशैली
जीविका की नई रणनीति में केवल सफलताओं पर ही नहीं, बल्कि जमीनी चुनौतियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिला और राज्य स्तर की टीमें अब उन फेलियर केस स्टडीज पर भी काम करेंगी. जहाँ किसी दीदी को जीविकोपार्जन में कठिनाई आई है या उनका व्यवसाय सफल नहीं हो पाया है। इन विफलताओं के कारणों की पहचान कर उनका समाधान निकाला जाएगा ताकि भविष्य में अन्य दीदियों को वैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, जीविका स्टाफ को संचार के आधुनिक उपकरणों और इंटरनेट के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. इससे फील्ड स्तर पर आने वाली समस्याओं का त्वरित निस्तारण होगा.जीविका के कार्यों में अधिक पारदर्शिता आएगी.
Location :
Sitamarhi,Bihar
First Published :
March 16, 2026, 16:40 IST

2 hours ago
